🔥 Holika Dahan 2026: भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की पौराणिक कथा | बुराई पर अच्छाई की जीत
🔥 होलिका दहन की पौराणिक कथा: भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु
होलिका दहन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इसकी पौराणिक कथा भक्त प्रह्लाद, उनके अहंकारी पिता हिरण्यकशिपु और होलिका से जुड़ी है।
👑 अहंकारी हिरण्यकशिपु की कहानी
प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नामक एक राक्षस राजा था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि वह न दिन में मरेगा, न रात में; न घर के अंदर, न बाहर; न अस्त्र से और न शस्त्र से; न मनुष्य से और न पशु से।
इस वरदान के कारण वह अत्यंत अहंकारी हो गया। उसने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया और प्रजा को उसकी पूजा करने का आदेश दिया।
🙏 भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति
हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। वह हर समय भगवान विष्णु का नाम जपता रहता था। यह बात हिरण्यकशिपु को बिल्कुल पसंद नहीं थी। उसने कई बार प्रह्लाद को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माना, तो उसने उसे मारने के कई प्रयास किए।
लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच जाते थे।
🔥 होलिका का वरदान और अग्नि परीक्षा
हिरण्यकशिपु ने अंत में अपनी बहन होलिका की मदद ली। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी। उसके पास एक दिव्य चादर थी, जिसे ओढ़कर वह आग में सुरक्षित रह सकती थी।
योजनानुसार, होलिका ने वह चादर ओढ़ी और प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर जलती हुई चिता पर बैठ गई।
✨ विष्णु की कृपा और होलिका दहन
प्रह्लाद पूरी अग्नि में भगवान विष्णु का नाम जपते रहे। उनकी अटूट भक्ति के कारण चमत्कार हुआ—वह दिव्य चादर उड़कर होलिका के शरीर से हटकर प्रह्लाद को ढकने लगी।
परिणामस्वरूप, होलिका आग में जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सकुशल बाहर आ गए।
इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष होलिका दहन मनाया जाता है।
🌼 होलिका दहन का धार्मिक महत्व
- यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है।
- सच्ची भक्ति और विश्वास की शक्ति सबसे बड़ी होती है।
इस दिन लोग अपने अंदर की नकारात्मकता, ईर्ष्या और द्वेष को त्यागने का संकल्प लेते हैं।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
होलिका दहन हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, सच्चाई और विश्वास के मार्ग पर चलने वालों की हमेशा रक्षा होती है।
भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और भगवान विष्णु की कृपा हमें यह संदेश देती है कि धर्म और सत्य की विजय निश्चित है।
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