पितृ वंदना हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक भावपूर्ण माध्यम है। पितृ पक्ष के पावन दिनों में हम अपने पितरों का स्मरण करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
यह भावपूर्ण पितृ वंदना भजन उन सभी प्रिय पूर्वजों को समर्पित है, जिनके संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद हमारे जीवन का आधार रहे हैं। दीप जलाकर, मन में श्रद्धा रखकर और अपने पितरों का स्मरण करके हम उनके प्रति नमन कर सकते हैं।
“आपकी यादों में दीप जलाएँ,
हे पितरों, शीश नवाएँ…” 🪔🙏
ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारे पितरों की कृपा और आशीर्वाद सदैव परिवार पर बना रहे और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि रहे।
(ओम् नमो)
(ओम् नमो) [Verse 1] बरगद की शीतल छाया में प्रातः का जल अर्पित करता काले तिल और अंजलि जल से पितरों का वंदन करता [Chorus] तुम्हीं से मिली यह सांसों की डोर तुम्हीं से रोशन जीवन का भोर कोटि प्रणाम हे पितर देव सदा रहे आशीर्वाद का छोर (हे पितर देव) [Verse 2] जड़ें तुम्हारी गहरी जितनी उतना ही लहराता यह वृक्ष संस्कारों की अविरल धारा सत्य दिखाए बनकर प्रत्यक्ष [Chorus] तुम्हीं से मिली यह सांसों की डोर तुम्हीं से रोशन जीवन का भोर कोटि प्रणाम हे पितर देव सदा रहे आशीर्वाद का छोर (हे पितर देव) [Outro] शांति मिले तुम्हें परम धाम में स्मरण रहे हर पावन नाम में नमन तुम्हें (कोटि नमन) (कोटि नमन)
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