गुरु रविदास जयंती 2026: जीवन परिचय, शिक्षाएं, दोहे और महत्व
गुरु रविदास जयंती पर पढ़ें उनका जीवन परिचय, महान शिक्षाएं, प्रसिद्ध दोहे और इस दिन का धार्मिक व सामाजिक महत्व। जानें कैसे उनकी वाणी आज भी समाज को समानता और भक्ति का संदेश देती है।
गुरु रविदास जयंती
गुरु रविदास जयंती संत रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में बड़े श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से माघ पूर्णिमा के दिन आता है। संत रविदास 15वीं शताब्दी के महान संत, समाज सुधारक और भक्त कवि थे, जिन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी वाणी में समानता, प्रेम, भक्ति और मानवता का संदेश मिलता है।
गुरु रविदास जी का जीवन परिचय
संत रविदास जी का जन्म वाराणसी (काशी) में हुआ था। वे एक साधारण परिवार में जन्मे थे, लेकिन उनकी सोच अत्यंत उच्च और पवित्र थी। उन्होंने समाज में फैली जाति-पाति और ऊंच-नीच की भावना का विरोध किया। वे मानते थे कि ईश्वर की नजर में सभी मनुष्य समान हैं।
रविदास जी बचपन से ही भक्ति और सेवा में लगे रहते थे। उन्होंने अपने कर्म और वाणी से लोगों को सच्ची भक्ति और मानवता का मार्ग दिखाया।
गुरु रविदास जी की प्रमुख शिक्षाएं
- सभी मनुष्य ईश्वर की संतान हैं, इसलिए सब बराबर हैं।
- जाति-पाति का भेदभाव गलत है।
- सच्ची भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
- मन की पवित्रता सबसे बड़ा धर्म है।
- प्रेम, दया और करुणा ही जीवन का मूल मंत्र हैं।
गुरु रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे
"मन चंगा तो कठौती में गंगा"
अर्थ: यदि मन पवित्र है तो हर स्थान पवित्र है।
"ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न"
अर्थ: वे ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ किसी को भूखा न रहना पड़े।
गुरु रविदास जयंती का महत्व
गुरु रविदास जयंती समाज में समानता, भाईचारा और भक्ति का संदेश फैलाने का अवसर है। इस दिन लोग भजन-कीर्तन, शोभा यात्रा और सत्संग का आयोजन करते हैं। उनके अनुयायी मंदिरों में जाकर उनकी वाणी का पाठ करते हैं और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
निष्कर्ष
गुरु रविदास जी की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थीं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, मानवता और समानता से ही समाज में शांति और सुख संभव है। गुरु रविदास जयंती हमें उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है।
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