Yogini Ekadashi Vrat Katha-योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण
भगवान विष्णुजी को एकादशी तिथि अति प्रिय है इसलिए जो लोग किसी भी पक्ष की एकादशी का व्रत करते हैं तथा अपनी सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करते हैं वह अनेक प्रकार के सांसारिक सुखों का भोग करते हुए अंत में प्रभु के परमधाम को प्राप्त होते हैं।
आषाढ़ कृष्ण एकादशी को योगिनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। योगिनी एकादशी का महत्व तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। श्राप से मुक्ति पाने के लिए यह व्रत कल्पतरु के समान है। योगिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से हर प्रकार के चर्म रोग और दुखों से मुक्ति मिलती है।
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पद्मपुराण के अनुसार, अलकापुरी में यक्षों के राजा शिवभक्त कुबेर के लिए प्रतिदिन हेम नामक माली अर्द्धरात्रि में फूल लेने मानसरोवर जाता और प्रात: राजा कुबेर के पास पहुंचाता था। एक दिन हेम माली रात्रि को फूल तो ले आया परंतु वह अपनी पत्नी के प्रेम के वशीभूत होकर घर पर विश्राम के लिए रुक गया।
प्रात: काल जब राजा कुबेर के पास भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचे तो उन्होंने हेम माली को श्राप दे दिया कि तुझे स्त्री वियोग सहना होगा। मृत्युलोक में कुष्ठ रोगी होकर रहना होगा। कुबेर के श्राप से हेम माली स्वर्ग से पृथ्वी पर जा गिरा और कुष्ठ रोगी हो गया। एक दिन वह भटकते हुए मार्कंडेय ऋषि के आश्रम में पहुंचा। ऋषि मार्कंडेय ने उसे आषाढ़ मास की योगिनी एकादशी का व्रत सच्चे भाव से करने को कहा। हेम माली ने व्रत किया तथा उसे श्राप से मुक्ति मिली।
हिंदू धर्म में वर्ष भर में कुल 24 एकादशी आती हैं, जो भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का अपना अलग महत्व, व्रत कथा और आध्यात्मिक लाभ होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत करने से सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
नीचे वर्ष की सभी 24 एकादशियों की सूची और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के लिंक दिए गए हैं। आप अपनी इच्छा अनुसार किसी भी एकादशी के बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं।
- सफला एकादशी
- पौष पुत्रदा एकादशी
- षटतिला एकादशी
- जया एकादशी
- विजया एकादशी
- आमलकी एकादशी
- पापमोचिनी एकादशी
- कामदा एकादशी
- वरुथिनी एकादशी
- मोहिनी एकादशी
- अपरा एकादशी
- निर्जला एकादशी
- योगिनी एकादशी
- देवशयनी एकादशी
- कामिका एकादशी
- श्रावण पुत्रदा एकादशी
- अजा एकादशी
- परिवर्तिनी एकादशी
- इन्दिरा एकादशी
- पापांकुशा एकादशी
- रमा एकादशी
- देवोत्थान एकादशी
- उत्पन्ना एकादशी
- मोक्षदा एकादशी
- सफला एकादशी

Varuthini Ekadashi 26th april 2022:
जवाब देंहटाएंवैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल वरुथिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है। ज्योतिष के अनुसार, इस शुभ योग में किए गए कार्यों का फल तीन गुना मिला है। मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
वरुथिनी एकादशी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा का महत्व और पारण का समय ?